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जब सब कुछ टूटता है, तभी सही दिशा मिलती है
जहाँ समझ नहीं आता कि आगे क्या करें और पीछे क्या छोड़ें।
मैं किसान हूँ।
मेरी ज़िंदगी खेत, मिट्टी और मेहनत से जुड़ी है।
लेकिन खेती हमेशा सिर्फ़ फसल नहीं देती,
ऐसा समय भी आया
जब फसल मवेशी खा गए,
ज़मीन बाटाई की थी,
और हाथ में कुछ नहीं आया।
मन बहुत टूट गया था।
समझ नहीं आता था—
गलती कहाँ हुई,
और अब क्या करना चाहिए।
सबसे मुश्किल बात यह थी
कि सही सलाह देने वाला कोई नहीं था।
लेकिन धीरे-धीरे मैंने एक बात समझी—
जो समय हमें तोड़ता है,
वही समय हमें सोचने की सही दिशा भी देता है।
मैंने सीख लिया कि
जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला
अक्सर नुकसान देता है।
मैंने सवाल पूछना शुरू किया।
सीखना शुरू किया।
और सबसे ज़रूरी—
खुद पर भरोसा करना शुरू किया।
आज भी चुनौतियाँ हैं।
खेती आसान नहीं है।
ज़िंदगी आसान नहीं है।
लेकिन अब डर पहले जैसा नहीं लगता।
क्योंकि अब मुझे पता है—
हर मुश्किल के बाद
एक नई दिशा ज़रूर मिलती है।
इस ब्लॉग “जीवन की दिशा” पर
मैं अपनी सच्ची बातें लिखूँगा—
खेती के अनुभव,
संघर्ष की कहानी,
और वो सीख
जो ज़िंदगी ने मुझे दी है।
अगर आप भी
कभी टूटे हैं,
कभी हारे हैं,
या रास्ता खोज रहे हैं—
तो आप अकेले नहीं हैं।
हम सब सीख रहे हैं।
धीरे-धीरे।
ईमानदारी से।
यही जीवन की दिशा है। 🌱
✍️ लेखक: जीवन की दिशा
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